जो समझ 70 में आती है, वही 35 में आ जाए तो ज़िंदगी बदल जाती है

जो समझ 70 में आती है, वही 35 में आ जाए तो ज़िंदगी बदल जाती है

अक्सर इंसान को 70–75 साल की उम्र में जाकर यह समझ आता है कि ज़िंदगी वास्तव में क्या है—समय की कीमत, निर्णयों का महत्व और सही प्राथमिकताएँ।
लेकिन अगर यही समझ 35–40 साल की उम्र में आ जाए, तो आपके पास सिर्फ़ अनुभव नहीं, बल्कि पूरे 40 साल की सक्रिय ज़िंदगी होती है उसे सही दिशा में लगाने के लिए।

रियल एस्टेट और निवेश में यही फर्क विज़न बनाता है।
जो व्यक्ति जल्दी समझ जाता है, वह जल्दबाज़ी में नहीं, रणनीति से फैसले करता है—
वह समय को दुश्मन नहीं, सबसे बड़ी संपत्ति बना लेता है।

जल्दी समझ आने का मतलब अमीर होना नहीं है,
बल्कि यह जान लेना है कि
कब इंतज़ार करना है,
कब जोखिम लेना है,
और कब गलत सौदे से दूर रहना है।

यही समझ ज़िंदगी को बोझ नहीं, एक सुनियोजित निवेश बना देती है।

(रियल एस्टेट ब्लॉग । प्रमेश कुमार)